जब आप सोचो 'बालगीत' और 'लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा' गीत दिमाग मैं ना आये ऐसा हो ही नही सकता. लगभग सभी तो यह गीत बचपन से सुनते आये है. 'लकड़ी की काठी' मशहूर गीत १९८३ मैं आयी फिल्म 'मासूम' से है. गीत के बोल लिखे है गुलज़ार साहब ने और इसको संगीतबद्द किया है आर.डी.बर्मन ने. यह गीत बडे प्यार और मासुमियत से गाया है, गौरी बापट, गुरप्रीत कौर और वनिता मिश्रा ने.
यह गीत छोटे उर्मिला मातोंडकर और जुगल हंसराज पर फिल्माया गया था और दोनो बडे प्यारे लग रहे थे. इस जानकारी के साथ पेश है, 'लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा' गीत के बोल हिंदी मै.
फिल्म / एल्बम : मासूम (1983)
यह गीत छोटे उर्मिला मातोंडकर और जुगल हंसराज पर फिल्माया गया था और दोनो बडे प्यारे लग रहे थे. इस जानकारी के साथ पेश है, 'लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा' गीत के बोल हिंदी मै.
संगीत दिया है: आर.डी.बर्मन
गीत के बोल: गुलज़ार
गायक: गौरी बापट, गुरप्रीत कौर, वनिता मिश्रा
लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा
घोडे की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
घोड़ा पहुंचा चौक में
चौक में था नाई
घोड़े जी की नाई ने हजामत जो बनाई
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घोड़ा था घमंडी
पहुंचा सब्जी मंडी
सब्जी मंडी बरफ पड़ी थी
बरफ में लग गई ठंडी
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घोड़ा अपना तगड़ा है
देखो कितनी चर्बी है
चलता है महरौली में
पर घोड़ा अपना अरबी है
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