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Friday, 15 November 2019

दुर्गा है मेरी माँ - Durga Hai Meri Maa Lyrics from Kranti

पाठको, भजन गीतो की सूची मैं पेश है 'दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ' गीत के बोल हिंदी मैं. यह गीत साल १९८१ मैं आयी फिल्म 'क्रांती' से है. इस गीत को संगीत दिया है मशहूर संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलालजी ने और इसे लिखा है संतोष आनंदजी ने. 'दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ' भजन गाया है महेंद्र कपूर और मिनू पुरुषोत्तम ने और इनकी आवाज ने यह भजन जीवित कर दिया है.

माँ दुर्गा और अम्बा को प्रणाम करते हुए प्रस्तुत है, 'दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ' गीत के बोल हिंदी मैं. जय माता दी!



फिल्म / एल्बम : क्रांति (1981)
संगीत दिया है: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीत के बोल: सन्तोष आनंद
गायक: महेंद्र कपूर, मिनू  पुरुषोत्तम

जयकरा...
शेरोंवाली का

बोल साचे दरबार की.. जय!!

दुर्गा है मेरी माँ
अम्बे है मेरी माँ (4)

ओ बोलो जय माता दी
जय हो.. (2)

जो भी दर पे आए
जय हो..
वो खाली न जाए
जय हो..

सबके काम है करती
जय हो..
सबके दुख ये हरती
जय हो..

ओ मैया शेरोवाली
जय हो..
ओ भरदे झोली खाली
जय हो.. (2)

दुर्गा है मेरी माँ
अम्बे है मेरी माँ (2)

पूरे करे अरमान जो सारे (4)

देती है वरदान जो सारे (2)

अम्बे.. देती है वरदान जो सारे...

ज्योतावालिये... देती है वरदान जो सारे...

देती है वरदान जो सारे...

दुर्गा है मेरी माँ
अम्बे है मेरी माँ (2)

लाटांवलिये
मेहरांवालिये..

सारे जग को खेल खिलाये (4)

बिछड़ों को जो खूब मिलाये (4)

दुर्गे मेरिए जानिये...
बिछड़ों को जो खूब मिलाये..

दुर्गा है मेरी माँ
अम्बे है मेरी माँ (2)

शेरोंवालिये.. दुर्गा है मेरी माँ... अम्बे है मेरी मा...
ज्योतांवालिये... दुर्गा है मेरी माँ... अम्बे है मेरी मा...
ऊँचे मंदिरां वालिये... दुर्गा है मेरी माँ... अम्बे है मेरी मा...
शेरोंवालिये..



रामचंद्र कह गए - Ramchandra Keh Gaye Siya Se Lyrics from Gopi

प्यारे पाठको, भजन गीत श्रेणी मैं प्रस्तुत है 'रामचंद्र कह गए सिया से' गीत के बोल हिंदी मैं. यह गीत साल १९७० मैं आयी फिल्म 'गोपी' से है. इस गीत के बोल/शब्द लिखे है राजेंद्र कृष्णजी ने और इसे अपने आवाज से सजाया है गायक महेंद्र कपूर ने. 'रामचंद्र कह गए सिया से' गीत को संगीत दिया है कल्याणजी-आनंदजी ने. इस फिल्म 'गोपी' मैं अभिनेता दिलीप कुमार साहब प्रमुख भूमिका मैं दिखे.

इस जानकारी के साथ पेश है, भजन 'रामचंद्र कह गए सिया से' गीत के बोल हिंदी मैं. जय सिया राम!




फिल्म / एल्बम : गोपी (1970)
संगीत दिया है: कल्याणजी-आनंदजी
गीत के बोल: राजेंद्र कृष्ण
गायक: महेंद्र कपूर

हे जी रे.. (4)

हे..
रामचंद्र कह गए सिया से (2)

ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का (2)

कौआ मोती खाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा

हे जी रे..

रामचंद्र कह गए सिया से (2)

ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का (2)

कौआ मोती खाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा

रामचंद्र कह गए सिया से..

सिया पूछे भगवान
कलयुग में धर्म - कर्म को
कोई नहीं मानेगा
तो प्रभु बोले

धर्म भी होगा कर्म भी होगा (2)

लेकिन शर्म नहीं होगी

बात बात में मात-पिता को (2)

बेटा आँख दिखाएगा...

हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा...
हे रामचंद्र कह गए सिया से..

राजा और प्रजा दोनों में
होगी निसिदिन खेचातानी खेचातानी...

कदम कदम पर करेंगे दोनों
अपनी अपनी मनमानी मनमानी...

जिसके हाथ में होगी लाठी (2)

भैंस वही ले जाएगा...
हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा... (2)

हे रामचंद्र कह गए सिया से..

सुनो सिया कलयुग में
काला धन और
काले मन होंगे
मन होंगे..

चोर उच्चक्के नगर सेठ
और प्रभु भक्त निर्धन होंगे..
निर्धन होंगे...

जो भी होगा लोभी भोगी (2)

वो जोगी कहलाएगा..

हंस चुगेगा दाना तुन का (2)

कौआ मोती खाएगा..

हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा...

हे रामचंद्र कह गए सिया से..

मंदिर सूना सूना होगा
भरी रहेगी मधुशाला
मधुशाला...

पिता के संग
संग भरी सभा में
नाचेगी घर की बाला...
घर की बाला...

हे.. कैसा कन्यादान
पिता ही
कैसा कन्यादान
पिता ही...
कन्या का धन खा जाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का (2)

कौआ मोती खाएगा...

हंस चुगेगा दाना तुन का

कौआ मोती खाएगा...

हे मूरख की प्रीत बुरी
जुए की जीत बुरी

बुरे संग बैठ ते भागे ही भागे
हे काजल की कोठरी में कैसे ही जतन करो

काजल का दाग भाई लागे ही लागे रे भाई
काजल का दाग भाई लागे ही लागे

हे जी रे...

कितना जती को कोई
कितना सती हो कोई
कामनी के संग काम
जागे ही जागे..

ऐ सुनो कहे गोपीराम
जिसका है नाम काम
उसका तो फंद गले लागे ही लागे रे भाई

उसका तो फंद गले लागे ही लागे..



Saturday, 26 October 2019

है प्रीत जहाँ की रीत सदा - Hai Preet Jahan Ki Lyrics from Purab Aur Paschim

दर्शको, देशभक्ती गीतो के श्रेणी मैं प्रस्तुत है, 'है प्रीत जहाँ की रीत सदा' गीत के बोल हिंदी में. यह गीत १९७० मैं आयी फिल्म 'पूरब और पश्चिम' से है. इस गीत को लिखा है इन्दीवरजी ने और संगीतबद्ध किया है कल्याणजी-आनंदजी ने. 'है प्रीत जहाँ की रीत सदा' गीत को गाया है महेंद्र कपूर ने और यह गीत मनोज कुमारजी पर चित्रित हुआ है.

इस जानकारी के साथ पेश है, 'है प्रीत जहाँ की रीत सदा' गीत के बोल हिंदी में. जय हिंद!


फिल्म / एल्बम : पूरब और पश्चिम (1970)
संगीत दिया है: कल्याणजी-आनंदजी
गीत के बोल: इन्दीवर
गायक: महेंद्र कपूर

जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने
भारत ने
मेरे भारत ने
दुनिया को तब गिनती आयी

तारों की भाषा भारत ने
दुनिया को पहले सिखलायी
देता ना दशमलव भारत तो
यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था
धरती और चाँद की दूरी का
अंदाज़ा लगाना मुश्किल था
सभ्यता जहाँ पहले आयी
पहले जनमी है जहाँ पे कला

अपना भारत वो भारत है
जिसके पीछे संसार चला
संसार चला और आगे बढ़ा
यूँ आगे बढ़ा
बढ़ता ही गया
भगवान करे ये और बढ़े
बढ़ता ही रहे और फूले-फले

है प्रीत जहाँ की रीत सदा
मैं गीत वहाँ के गाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ

है प्रीत जहाँ की रीत सदा...

काले-गोरे का भेद नहीं
हर दिल से हमारा नाता है
कुछ और न आता हो हमको
हमें प्यार निभाना आता है
जिसे मान चुकी सारी दुनिया
मैं बात वो ही दोहराता हूँ

भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ..

जीते हो किसी ने देश तो क्या
हमने तो दिलों को जीता है
जहाँ राम अभी तक है नर में
नारी में अभी तक सीता है
इतने पावन हैं लोग जहाँ
मैं नित-नित शीश झुकाता हूँ

भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ...

इतनी ममता नदियों को भी
जहाँ माता कह के बुलाते हैं
इतना आदर इन्सान तो क्या
पत्थर भी पूजे जाते हैं
इस धरती पे मैंने जनम लिया
ये सोच के मैं इतराता हूँ

भारत का रहने वाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ...