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Saturday, 16 November 2019

सुख के सब साथी - Sukh Ke Sab Saathi Lyrics from Gopi

प्यारे पाठको, प्रस्तुत है भजन श्रेणी मैं और एक 'सुख के सब साथी दुःख में ना कोई' गीत के बोल हिंदी मैं. यह गीत साल १९७० मैं आयी फिल्म 'गोपी' से है. इस फिल्म मैं अभिनेता दिलीप कुमार प्रमुख भूमिका मैं दिखे. 'सुख के सब साथी दुःख में ना कोई' गीत के बोल लिखे है राजिंदर कृषणजी ने और इसे गाया है मो.रफ़ी साहब ने अपने जादुई आवाज मै. इस गीत को संगीतबद्ध किया है उस दौर की मशहूर संगीतकार जोडी कल्याणजी-आनंदजी ने.

इस जानकारी के साथ पेश है, 'सुख के सब साथी दुःख में ना कोई' गीत के बोल हिंदी मैं. धन्यवाद!



फिल्म / एल्बम : गोपी (1970)
संगीत दिया है: कल्याणजी-आनंदजी
गीत के बोल: राजिंदर कृषण
गायक: मो.रफ़ी

सुख के सब साथी
दुःख में ना कोई (2)

मेरे राम
मेरे राम
तेरा नाम एक सांचा
दूजा न कोई...

सुख के सब साथी
दुःख में ना कोई

जीवन आनी-जानी छाया (2)

झूठी माया झूठी काया

फिर काहे को सारी उमरिया (2)

पाप की गठरी ढोई..

सुख के सब साथी
दुःख में ना कोई

मेरे राम
मेरे राम
तेरा नाम एक सांचा
दूजा न कोई...

ना कुछ तेरा
ना कुछ मेरा (2)

ये जग जोगी वाला फेरा..

राजा हो या रंक सभी का (2)

अंत एक सा होई...

सुख के सब साथी
दुःख में ना कोई

मेरे राम
मेरे राम
तेरा नाम एक सांचा
दूजा न कोई...

सुख के सब साथी
दुःख में ना कोई....



Friday, 15 November 2019

रामचंद्र कह गए - Ramchandra Keh Gaye Siya Se Lyrics from Gopi

प्यारे पाठको, भजन गीत श्रेणी मैं प्रस्तुत है 'रामचंद्र कह गए सिया से' गीत के बोल हिंदी मैं. यह गीत साल १९७० मैं आयी फिल्म 'गोपी' से है. इस गीत के बोल/शब्द लिखे है राजेंद्र कृष्णजी ने और इसे अपने आवाज से सजाया है गायक महेंद्र कपूर ने. 'रामचंद्र कह गए सिया से' गीत को संगीत दिया है कल्याणजी-आनंदजी ने. इस फिल्म 'गोपी' मैं अभिनेता दिलीप कुमार साहब प्रमुख भूमिका मैं दिखे.

इस जानकारी के साथ पेश है, भजन 'रामचंद्र कह गए सिया से' गीत के बोल हिंदी मैं. जय सिया राम!




फिल्म / एल्बम : गोपी (1970)
संगीत दिया है: कल्याणजी-आनंदजी
गीत के बोल: राजेंद्र कृष्ण
गायक: महेंद्र कपूर

हे जी रे.. (4)

हे..
रामचंद्र कह गए सिया से (2)

ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का (2)

कौआ मोती खाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा

हे जी रे..

रामचंद्र कह गए सिया से (2)

ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का (2)

कौआ मोती खाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा

रामचंद्र कह गए सिया से..

सिया पूछे भगवान
कलयुग में धर्म - कर्म को
कोई नहीं मानेगा
तो प्रभु बोले

धर्म भी होगा कर्म भी होगा (2)

लेकिन शर्म नहीं होगी

बात बात में मात-पिता को (2)

बेटा आँख दिखाएगा...

हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा...
हे रामचंद्र कह गए सिया से..

राजा और प्रजा दोनों में
होगी निसिदिन खेचातानी खेचातानी...

कदम कदम पर करेंगे दोनों
अपनी अपनी मनमानी मनमानी...

जिसके हाथ में होगी लाठी (2)

भैंस वही ले जाएगा...
हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा... (2)

हे रामचंद्र कह गए सिया से..

सुनो सिया कलयुग में
काला धन और
काले मन होंगे
मन होंगे..

चोर उच्चक्के नगर सेठ
और प्रभु भक्त निर्धन होंगे..
निर्धन होंगे...

जो भी होगा लोभी भोगी (2)

वो जोगी कहलाएगा..

हंस चुगेगा दाना तुन का (2)

कौआ मोती खाएगा..

हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा...

हे रामचंद्र कह गए सिया से..

मंदिर सूना सूना होगा
भरी रहेगी मधुशाला
मधुशाला...

पिता के संग
संग भरी सभा में
नाचेगी घर की बाला...
घर की बाला...

हे.. कैसा कन्यादान
पिता ही
कैसा कन्यादान
पिता ही...
कन्या का धन खा जाएगा

हंस चुगेगा दाना तुन का (2)

कौआ मोती खाएगा...

हंस चुगेगा दाना तुन का

कौआ मोती खाएगा...

हे मूरख की प्रीत बुरी
जुए की जीत बुरी

बुरे संग बैठ ते भागे ही भागे
हे काजल की कोठरी में कैसे ही जतन करो

काजल का दाग भाई लागे ही लागे रे भाई
काजल का दाग भाई लागे ही लागे

हे जी रे...

कितना जती को कोई
कितना सती हो कोई
कामनी के संग काम
जागे ही जागे..

ऐ सुनो कहे गोपीराम
जिसका है नाम काम
उसका तो फंद गले लागे ही लागे रे भाई

उसका तो फंद गले लागे ही लागे..