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Sunday, 17 November 2019

मैं ज़िन्दगी का साथ - Main Zindagi Ka Saath Lyrics from Hum Dono

प्यारे दर्शको, प्रस्तुत है आपके सामने, 'मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया' गीत के बोल हिंदी मैं. यह गीत साल १९६१ मैं आयी फिल्म 'हम दोनों' से है. इस गीत के शब्द लिखे है साहिर लुधियानवी साहब ने और इसे गाया है महान गायक मो.रफ़ी ने. 'मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया' गीत को संगीतबद्ध  किया है संगीतकार जयदेव ने. यह गीत देव आनंद साहब पर चित्रित हुआ था और उनका मस्त-मौला अंदाज इस गीत मैं साफ दिखाई देता है.

इस जानकारी के साथ पेश है, 'मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया' गीत के बोल हिंदी मैं. आनंद ले!


फिल्म / एल्बम : हम दोनों (1961)
संगीत दिया है: जयदेव
गीत के बोल: साहिर लुधियानवी
गायक: मो.रफ़ी

मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया

हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया... (2)

बरबादियों का सोग मनाना फ़जूल था (2)

मनाना फ़जूल था...
मनाना फ़जूल था...

बरबादियों का जश्न मनाता चला गया (2)

हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया...

जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया (2)

मुकद्दर समझ लिया...
मुकद्दर समझ लिया...

जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया (2)

हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया...

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ (2)

न महसूस हो जहाँ...
न महसूस हो जहाँ...

मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया (2)

मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया
हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया...


Tuesday, 24 September 2019

बच्चे मन के सच्चे - Bachche Man Ke Sachche Lyrics from Do Kaliyan

प्यारे बहनो और भाइयों, आपके सामने पेश है १९६८ मै आयी फिल्म 'दो कलियाँ' से 'बच्चे मन के सच्चे' गीत के बोल. 'बच्चे मन के सच्चे' गीत को लिखा था साहिर लुधियानवीजी ने और इस गाने को संगीत बद्द किया था रवी ने. यह गाना बहुत ही खुबसुरती से गाया है लता मंगेशकर दीदी ने, यही कारण है की १९६९ का गाना आज के दौर मै भी सुना जा रहा है.

इसे हम बालगीत भी कह सकते है, पेश है इसी संपूर्ण 'बच्चे मन के सच्चे' गीत के बोल हिंदी मै. आशा है आप सभी को पसंद आयेंगे. धन्यवाद!


फिल्म / एल्बम : दो कलियाँ (1968)
संगीत दिया है: रवि
गीत के बोल: साहिर लुधियानवी
गायक: लता मंगेशकर

बच्चे मन के सच्चे
सारे जग की आँख के तारे
ये वो नन्हें फूल हैं जो
भगवान को लगते प्यारे
बच्चे मन के सच्चे...

खुद रूठे, खुद मन जायें, फिर हमजोली बन जायें
झगड़ा जिसके साथ करे, अगले ही पल फिर बात करे
इनको किसी से बैर नहीं, इनके लिए कोई ग़ैर नहीं
इनका भोलापन मिलता है सबको बाँह पसारे
बच्चे मन के सच्चे...

इन्साँ जब तक बच्चा है, तब तक समझो सच्चा है
ज्यूँ-ज्यूँ उसकी उमर बढ़े, मन पर झूठ का मैल चढ़े
क्रोध बढ़े, नफ़रत घेरे, लालच की आदत घेरे
बचपन इन पापों से हटकर अपनी उमर गुज़ारे
बच्चे मन के सच्चे...

तन कोमल, मन सुन्दर है, बच्चे बड़ों से बेहतर हैं
इनमें छूत और छात नहीं, झूठी ज़ात और पात नहीं
भाषा की तकरार नहीं, मज़हब की दीवार नहीं
इनकी नज़रों में एक है, मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे
बच्चे मन के सच्चे...